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बिहार में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना: पात्र महिलाओं को 2 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता पाने के लिए शुरू हुआ घर-घर सत्यापन अभियान

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पटना। बिहार सरकार ने स्वरोजगार को बढ़ावा देने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 10 हजार रुपये देने के बाद अब अगले चरण की तैयारी शुरू कर दी है। राज्य में जिन महिलाओं को 10-10 हजार रुपये मिले थे, उन्हें अब 2 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता लेने के लिए नए नियमों के अनुसार सत्यापन प्रक्रिया से गुजरना होगा। सरकार ने साफ किया है कि बिना भौतिक सत्यापन किसी को राशि नहीं मिलेगी और यह अभियान राज्य के 3398 वार्डों में विशेष कर्मियों के माध्यम से संचालित होगा। इन विशेष कर्मियों की जिम्मेदारी होगी कि वे आवेदकों की पहचान, दस्तावेजों की जांच और पात्रता का सत्यापन पूरी तरह से करें।
जानकारी के अनुसार विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में 1.56 लाख महिलाओं को पहले चरण की राशि दी जा चुकी थी। अब पात्र लाभार्थियों को 2 लाख रुपये तक की सहायता राशि प्रदान करने से पहले ग्रामीण और शहरी वार्ड स्तर पर व्यापक जांच-पड़ताल की जाएगी। नगर विकास एवं आवास विभाग ने योजना के पारदर्शी क्रियान्वयन के लिए सभी नगर निकायों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 264 नगर निकायों को दो वर्गों में बांटा गया है। 123 नए नगर निकायों में राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से कार्य होगा, जबकि 141 पुराने नगर निकायों में ‘जीविका’ पोर्टल के जरिए आवेदन और सत्यापन प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
राज्य सरकार ने सुनिश्चित किया है कि नगर निकाय कर्मी पात्र महिलाओं को आवेदन से लेकर सत्यापन तक हर स्तर पर सहयोग देंगे। सत्यापन और आवेदन निष्पादन की प्रक्रिया नौ चरणों में बांटी गई है। 13 फरवरी को भौतिक सत्यापन के लिए नोडल पदाधिकारियों की तैनाती की गई थी। 15 फरवरी को प्रत्येक वार्ड में सत्यापन कर्मियों की प्रतिनियुक्ति हुई। 20 फरवरी तक सत्यापन और जांच पूरी कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। 23 फरवरी तक जांच के बाद आवेदन पोर्टल पर स्वीकृत/अस्वीकृत कर स्वयं सहायता समूहों से साझा किए जाएंगे। 28 फरवरी तक सामुदायिक संसाधन व्यक्ति व सेवी द्वारा वार्ड स्तर पर समूह गठन होगा। 5 मार्च तक समूह की बैठक और आवश्यक दस्तावेज संग्रह किए जाएंगे। 7 मार्च तक सीआरपी द्वारा ऑनलाइन आवेदन नोडल पदाधिकारी को भेजा जाएगा। 12 मार्च तक नोडल पदाधिकारी द्वारा जांच कर आवेदन नगर आयुक्त/कार्यपालक पदाधिकारी को प्रेषित किया जाएगा। 15 मार्च तक अंतिम स्वीकृत सूची ‘जीविका’ को भेजी जाएगी।
सरकार का कहना है कि इस सघन और पारदर्शी सत्यापन प्रक्रिया के जरिए योजना का लाभ वास्तविक और जरूरतमंद महिलाओं तक ही पहुंचेगा। इस पहल से न केवल महिलाओं को स्वरोजगार शुरू करने में मदद मिलेगी, बल्कि यह उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और अपने परिवार की स्थिति मजबूत करने का अवसर भी देगी। योजना की यह प्रक्रिया राज्य भर में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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